बवासीर के लिए जात्यादी का तेल

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jatyadi oil for piles

आयुर्वेद में  हर बीमारी का इलाज संभव है और इसके साइड इफ़ेक्ट भी कम होते हैं। जात्यादि तेल भी एक आयुर्वेदिक तेल है जिसके अनेक फायदे सुन आप चकित हो जाएँगे।

जात्यादि तेल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोबियल, और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं जो किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन को ठीक कर सकते हैं। त्वचा रोग, त्वचा जल जाना, खुजली, मुंहासे, पिम्पल, घाव, त्वचा के कट जाने और भी कई त्वचा से संबंधित परेशानियां हैं जिनका इलाज जत्यादी तेल से किया जा सकता है।

मकड़ी या किसी जहरीले जीव के काटने पर इस तेल का प्रयोग जहर के असर को कम कर देता है। यह फिशर, फिस्टुला और बवासीर के मस्सों को खत्म कर सकता है। जात्यादि तेल में फ्लावोनोइड (flavonoid), ग्लाइकोसाइड (glycoside), टैनिन (tannin), स्टेरॉयड (steroid), अल्कालॉयड (alkaloid) जैसे पदार्थ पाए जाते हैं जो घाव भरने में सहायता देते हैं।

बवासीर में जात्यादि तेल का उपयोग क्यों करें?

बवासीर के लक्षणों से परेशान हैं और इनसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो जात्यादि तेल का उपयोग कर सकते हैं। आप इस तेल को मलाशय और गुदा के आस-पास लगा सकते हैं। यह बवासीर की वजह से हो रही खुजली, जलन और दर्द से छुटकारा दिलाता है। यह गुदा के सूजन को खत्म कर देता है और स्टूल पास करने में भी सहायता करता है। खूनी बवासीर में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

बवासीर के लिए जात्यादि तेल का इस्तेमाल कैसे करें?

पाइल्स या फिशर में जात्यादि तेल का उपयोग इन तरीकों से कर सकते हैं-

  • रुई की पट्टी लें और उसे जत्यादी तेल में डुबोएं।
  • अब इस पट्टी के माध्यम से गुदा में तेल लगाएं।
  • दोबारा तेल लगाने के लिए दूसरी पट्टी ले लें। एक बार डुबोई जा चुकी पट्टी को तेल में दोबारा न डुबोएं।
  • आप इस तरह से जात्यादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको इसे मल त्यागने से पहले, मल त्यागने के बाद, सुबह नहाने के बाद और रात को सोने से पहले लगाना चाहिए। इसलिए, सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको इसे कम से कम 4 बार लगाने की आवश्यकता है।

जात्यादि तेल के अन्य फायदे:

  • घाव भरना- जात्यादि तेल के उपयोग से घाव आसानी से भर जाते हैं। रुई के माध्यम से इस तेल को घाव पर लगाएँ। पुराने घाव जो ठीक नहीं हो रहे हैं यह उन्हें भी ठीक कर सकता है।
  • छाला में फ़ायदेमंद- मुंह में छाला है या फफोले हैं तो जात्यादि तेल का इस्तेमाल करें। छाला के ऊपर इस तेल को लगाएँ।
  • त्वचा रोग- हर प्रकार के त्वचा रोग में जात्यादि का तेल फ़ायदेमंद है। मुंह का अल्सर, एक्जिमा, त्वचा का लाल होना आदि रोगों को यह आसानी से ठीक कर देता है।
  • फटी एड़ी ठीक करे- फटी एड़ियां भरने के लिए जात्यादि तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा यह त्वचा फटने के अन्य रोग जैसे फिशर और फिस्टुला में भी फ़ायदेमंद है।
  • जलन में फ़ायदेमंद- सनबर्न या फिर आग से झुलस गए हैं तो जात्यादि तेल लगा सकते हैं। यह त्वचा को ठंडक पंहुचाता है जलने की वजह से उत्पन्न हुए दाग को भी ठीक करता है।

बवासीर में जात्यादि तेल के साइड इफ़ेक्ट:

यदि जात्यादि तेल को बाहरी त्वचा में लगाया जाता है तो इसके कोई भी नुकसान नहीं हैं। इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद आप इसे इस्तेमाल में ला सकते हैं। अगर इस तेल का सेवन करते हैं तो कुछ नुकसान नज़र आ सकते हैं।

क्या गर्भवती महिलाएं बवासीर में जात्यादि तेल का उपयोग कर सकती हैं?

गर्भवती महिलाएं पाइल्स से छुटकारा पाने के लिए जात्यादि तेल का उपयोग कर सकती हैं। यह सेफ है और बाहरी रूप से इस्तेमाल करने पर कोई नुकसान नहीं पंहुचाता है। गर्भवती महिलाएं  फिशर, फिस्टुला या फिर किसी प्रकार के घाव को ठीक करने के लिए उपयोग करें।गर्भवती महिलाओं के अलावा स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इस तेल का उपयोग कर सकती हैं।

जात्यादि तेल सामग्री:

जात्यादि तेल निम्नलिखित सामग्रियों से बनाया जाता है:

जातिपत्र (गदा पेड़ की पत्तियां) - मिरिस्टिका सुगंध

10 ग्राम

नीम - अजाडिराक्टा इंडिका

10 ग्राम

पटोल (नुकीले लौकी के पत्ते) - ट्राइकोसैंथेस डियोइका

10 ग्राम

करंज (करंज) के बीज - पोंगामिया पिनाटा

10 ग्राम

करंज (करंज) की पत्तियाँ - पोंगामिया पिन्नाटा

10 ग्राम

यष्टिमधु (मुलेठी) – ग्लाइसीराइजा ग्लबरा

10 ग्राम

कुथ या कुष्ट (भारतीय कोस्टस रूट) - सौसुरिया लप्पा

10 ग्राम

हल्दी (हल्दी) - करकुमा लोंगा

10 ग्राम

मोम

10 ग्राम

दारुहल्दी (दारुहरिद्रा) - बर्बेरिस अरिस्टाटा

10 ग्राम

मंजिष्ठा - रूबिया कॉर्डिफ़ोलिया

10 ग्राम

कुटकी - पिक्रोरिज़ा कुर्रोआ

10 ग्राम

पद्मका - प्रूनस सेरासोइड्स

10 ग्राम

लोधरा - सिम्प्लोकोस रेसमोसा

10 ग्राम

हरीतकी या हरड़ (चेबुलिक मायरोबालन) - टर्मिनलिया चेबुला

10 ग्राम

नील कमल (ब्लू स्टार वॉटर लिली) - निम्फिया स्टेलटाटा

10 ग्राम

सारिवा (अनंतमूल या इंडियन सार्सापैरिला) - हेमिडेसमस इंडिकस

10 ग्राम

तुथ्या - कॉपर सल्फेट

10 ग्राम

तिल का तेल

750 मि.ली

पानी

3 लीटर

जात्यादि तेल कैसे बनाएं:

  1. एक पैन में पानी और तिल का तेल लें.
  2. पानी और तिल के तेल के साथ पैन में उपरोक्त तालिका में बताए अनुसार अनुपात में प्राकृतिक सामग्री का मोटा पाउडर डालें।
  3. सभी सामग्री को पानी और तेल में मिलाने के लिए हिलाएँ।
  4. बर्तन को चूल्हे पर रख दीजिए.
  5. - मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक सिर्फ तेल न रह जाए.
  6. 24 घंटे के बाद, तेल को छान लें और अवशेषों को हटा दें।

निष्कर्ष:

जात्यादि तेल के कई फायदे हैं और इसका उपयोग बवासीर में भी किया जा सकता है। लेकिन, केवल बाहरी रूप से ही इसे प्रयोग करें। इसका सेवन बिलकुल न करें। वैसे तो इसके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं हैं लेकिन इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें। बवासीर से छुटकारा पाने के लिए जात्यादि तेल एक अच्छा उपाय हो सकता है, सिर्फ सावधानी से उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

1.बवासीर के लिए जत्यादि तेल का उपयोग क्यों करना चाहिए?

आप जात्यादि तेल को मलाशय और गुदा के आसपास लगा सकते हैं। यह गुदा क्षेत्र में बवासीर के       कारण होने वाली खुजली, दर्द, परेशानी और जलन को कम करता है । साथ ही, यह मल को आसानी से बाहर   निकालने में मदद करता है।

2. जात्यादि तेल का क्या काम है?

इसका उपयोग फफोले, साइनस, नॉनहीलिंग घावों आदि में त्वरित घाव भरने के लिए किया जाता है। जात्यादि तेल एक एंटीसेप्टिक और कवकनाशी तेल के रूप में कार्य करता है।

3.जात्यादि तेल की कीमत क्या है?

जात्यादि तेल की कीमत अलग-अलग ब्रांड के लिए अलग-अलग होगी। इसकी कीमत ₹125-₹135 लगभग हो सकती है।

4.जात्यादि तेल का उपयोग कैसे करें?

एक बाथटब में 5-6 बूंद जात्यादी का तेल डालें और अपने गुदा को उस पानी में लगभग 10 मिनट तक रखें| बवासीर के इलाज का ये घरेलू नुस्ख़ा आप दिन में तीन से चार बार प्रयोग में ला सकते हैं| धीरे-धीरे आप बवासीर के मस्से और उससे होने वाली जलन एवं पीड़ा को ग़ायब होता महसूस करेंगे|

Reference Links:

https://www.ayurtimes.com/jatyadi-oil/